हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, पश्चिम बंगाल मे हुज्जतुल इस्लाम मासूम अली गाज़ी ने एक मजलिस में कहा कि आज इंसानियत को पहले से ज्यादा इमाम हुसैन (अ) की ज़िंदगी और उनके संदेश को समझने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ती नैतिक, सामाजिक और मानवीय समस्याओं का हल हुसैनी उसूलों, कुर्बानी, इंसाफ और आज़ादी की सोच को अपनाने में है।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ) पूरी मानवता के लिए एक आदर्श हैं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी से यह दिखाया कि इंसान को हमेशा सच, इंसाफ और मानवता के साथ खड़ा रहना चाहिए और ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।
मासूम अली गाज़ी ने कहा कि इमाम हुसैन (अ) सिर्फ मुसलमानों या इस्लामी इतिहास की शख्सियत नहीं हैं, बल्कि दुनिया भर के सभी न्यायप्रिय और स्वतंत्र विचार रखने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। कर्बला का संदेश हमें इज़्ज़त, सच्चाई, इंसाफ और इंसानी गरिमा की रक्षा करना सिखाता है।
उन्होंने कहा कि कर्बला की घटना हमें यह सबक देती है कि अन्याय और भ्रष्टाचार के सामने कभी चुप नहीं रहना चाहिए। इमाम हुसैन (अ) ने अपने परिवार और साथियों के साथ बड़ी कुर्बानी देकर यह साबित किया कि धर्म और इंसानी मूल्यों की रक्षा के लिए हर तरह का त्याग करना पड़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि इमाम हुसैन (अ) की मोहब्बत, दया और इंसानियत किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। हर वह व्यक्ति जो सच, इंसाफ और मानवता से प्रेम करता है, वह उनके जीवन से प्रेरणा ले सकता है। आशूरा का संदेश यह है कि आखिरकार सच की जीत होती है और झूठ व अत्याचार को हार का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को आशूरा के संदेश की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है, क्योंकि समाज में मौजूद कई समस्याओं का समाधान हुसैनी विचारधारा और मूल्यों में छिपा हुआ है।
कार्यक्रम के अंत में अकीदतमंदों ने मरसिया और नौहाख्वानी के माध्यम से इमाम हुसैन (अ) और अहलेबैत (अ) की याद को ताज़ा किया तथा उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उपस्थित लोगों ने समाज में एकता, अच्छे आचरण और इंसाफ को बढ़ावा देने का संकल्प भी लिया।
इस अवसर ने एक बार फिर यह साबित किया कि कर्बला और आशूरा का संदेश आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है और आने वाली पीढ़ियों को सच, इंसाफ और इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।
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